किंगफिशर एयरलाइन कैसे डूब गई ?

आज के इस ब्लॉग के माध्यम से मैं आपको बताना चाहता हूं कि किंगफिशर एयरलाइन कैसे डूब गई. किंगफिशर की स्थापना 2003 में हुई थी और पहली बार 2005 में उनका पहला हवाई जहाज उड़ा था किंगफिशर की बात करें तो एक्सपीरियंस लग्जरी और लाइफ स्टाइल के बारे में क्या कहना फ्लाइट के अंदर बहुत ही अच्छा खाना मिलता था इंटीरियर बहुत ही अच्छा था लाजवाब एक्सपीरियंस मिलता था फिर भी एयरलाइंस नाकामयाब हो गई ध्यान दीजिएगा स्पेशल ऑनलाइन सर्विसेज और लाइफस्टाइल कैटेगरी के अंदर हमेशा एक नंबर पर रही थी एयर होस्टेस का चयन खुद विजय माल्या करते थे उन्होंने अपने मॉडल का सिलेक्शन तो खुद किया लेकिन जो प्रॉब्लम था वह उनके बिजनेस मॉडल के अंदर था.

किंगफिशर एयरलाइन का नादानियां होने के मुख्य कारण ऐसे समझ में आ रहे हैं जिसमें से पहला कारण है

1. मिस मैनेजमेंट-

किंगफिशर एयरलाइन के अंदर पहले से ही मिस मैनेजमेंट था जिसकी वजह से वह स्कैंडल बन गया अगर आप इसको दूसरा उदाहरण देखेंगे तो सत्यम के अंदर पहले करप्शन था पहले से ही स्कैंडल था जो कि बाद में मिस मैनेजमेंट बन गया विजय माल्या ने शुरुआत से ही ना कोई फुल टाइम मैनेजर रखा ना कोई डिरेक्टर था संजय अग्रवाल ने ज्वाइन किया लेकिन वह बहुत देरी से आए थे कि उनके बस में कुछ नहीं था अगर आप किंग फिशर के ट्रेवलिंग रूट देखेंगे तो यह सबसे बड़ा मिस मैनेजमेंट था कि जहां पर कोई भी एयरलाइन सर्विस नहीं दे रही थी या घाटे वाली रूट थी वहां पर किंगफिशर ने सबसे ज्यादा फ्लाइट बढ़ाई उन्होंने कभी सही  Business Model बनाया ही नहीं जिसकी वजह से ट्रैफिक कब हुआ और घटा बढ़ता गया बार बार वह बैंक के पास पैसा लेते रहे लेकिन प्रॉफिट कभी भी बना न पाए, इसके सामने सत्यम को देखेंगे तो उसका Business Model  अच्छा था जिसकी वजह से जैसे ही सत्य में डूबा हुआ आनंद महिंद्रा आ गए और उन्होंने सत्यम को टेकओवर कर लिया. किंगफिशर का Business Model ही नहीं था जिसकी वजह से किसी ने उनका हैंड होल्डिंग भी नहीं किया अगर किंगफिशर के सामने आप इंडिगो को देखेंगे तो इंडिगो के पास एक ही तरह का मॉडल एक ही तरह की सर्विसेज और एक ही तरह की सारे एयरक्राफ्ट रहते थे यहां तक की उन्होंने अपने स्टाफ में भी सिर्फ मेल या सिर्फ फीमेल ही रखें ताकि क्योंकि उंहें रूम शेयरिंग बेसिस दिए जाएं तो ऑपरेटिंग कॉस्ट काफी कम हो जाती थी

अगर आप Indigo और किंगफिशर को देखेंगे तो आमतौर पर Indigo को लो कॉस्ट कैरियर माना जाता है हालांकि इंडिगो फ्लाइट कैरियर है फ्यूल कॉस्ट एयरपोर्ट चार्जेस वह तो सारी फ्लाइट्स को एक सही लगता है किंतु लॉन्च एक्सेस और मील मैं कटौती कर Indigo अपनी ऑपरेशनल एक्सीलेंस की वजह से कोस्टको कम रखते हुए प्रॉफिट मार्जिन थोड़ा सा ज्यादा ले लेती थी

2.  Expansion With out profit

जिस दिन से किंगफिशर की शुरुआत हुई थी उस दिन से जब तक वह बंद हो गई तब तक किंगफिशर कभी भी प्रॉफिटएबिलिटी में आई ही नहीं थी.
ऊपर से इन्होंने डेक्कन एयरलाइंस (550 cr) मैं ली जोकि एक घटा करने वाली संस्था थी. यह भी जैसे कम था तो उन्होंने इंटरनेशनल फ्लाइट्स की शुरुआत कर दी. किंगफिशर एयरलाइंस की भारत के अंदर जितने भी फ्लाइट थी वह घटा दे रही थी ऊपर से उन्होंने इंटरनेशनल फ्लाइट शुरू कर दी जिसमें उनका घाटा और भी बढ़ा दिया.
ऊपर से डेक्कन एयरलाइंस का नाम उन्होंने किंगफिशर रेड रख लिया जिसकी वजह से किंगफिशर का कंपटीशन हि किंगफिशर रेड से हो गया ऐसा रतन टाटा ने भी किया था जगुआर के लेने के ऊपर लेकिन उन्होंने Jaguar का नाम जगुआर ही रखा था. इसे आइडेंटिटी क्राइसिस (identity crisis)  के नाम से जाना जाता है

Expansion without profit is committing suicide

जो स्टार्टअप खत्म हो रहे हैं उस का मुख्य कारण है लिक्विडिटी प्रॉफिट एबिलिटी लॉन  पेमेंट रिजर्व सर प्लस कैश सर प्लस और बाद में एक्वीजीशन एक्सपेंशन में जाना चाहिए

3. Fast cash no profit

किंगफिशर के पास रोज कैश आता था लेकिन उसका प्रॉफिट मार्जिन बहुत ही कम था. अगर आप रिटेल बिजनेस को देखेंगे तो उनके पास रोज कैश आता है लेकिन उनका प्रॉफिट मार्जिन बहुत ही कम रहता है और अगर आप रियल एस्टेट के बिजनेस को देखेंगे तो वहां पर कैश एक लंबे समय के बाद आता है लेकिन उसका प्रॉफिट ज्यादा होता है. अगर आप लो प्रॉफिट बिज़नस में कैश जो आपके पास हर रोज आता है उसको आप कहीं और निवेश कर देते हैं आपका बिजनेस आउट ऑफ़ बिज़नस हो ही जाएगा. किंगफिशर एयरलाइंस ने ना सही गिनती की अपने पोस्ट की ना सही फोरकास्ट कर पाई अपने बिजनेस की. भारत के अंदर बिजनेस क्लाइमेट एयरलाइंस इंडस्ट्रीज के लिए वैसे ही लो प्रॉफिट रहा है लेकिन अगर किंगफिशर एयरलाइंस अपने बिजनेस मॉडल के ऊपर ध्यान देती थी तो वह ऑपरेशनल एक्सीलेंस की वजह से प्रॉफिट ले पाती थी

Handling and managing cash is dangerous.

3. Business recession

2008 में पूरी दुनिया में बिजनेस की हालत खराब थी जिसकी असर किंगफिशर एयरलाइन और बाकी के अलायंस के ऊपर भी हुई पहले तो किंगफिशर का ऑक्यूपेंसी रेट बहुत कम था उसके ऊपर उनके टिकट बिक नहीं रहे थे. किसी भी एयरलाइंस के अंदर 50% कॉस्ट फ्यूल की हो ती है. अगर किसी भी फ्लाइट में 75% से कम ऑक्यूपेंसी आएगी तो वह फ्लाइट घटा ही करने वाली है. हमारे इंडियन रुपीस का भाव कम हो रहा था और अमेरिकन डॉलर का भाव बढ़ रहा था जिसकी वजह से पेट्रोल के दाम में बढ़ोतरी हो गई उसकी वजह से जो नुकसान किंगफिशर एयरलाइंस को हो रहा था वह और भी बढ़ गया

इस ब्लॉग के माध्यम से मैं आपको बताना चाहता हूं कि जो गलतियां किंगफिशर एयरलाइन ने की है वैसी गलतियां आप तो कहीं नहीं कर रहे हैं आपके पास आपका बिजनेस  सही होना चाहिए कॉस्ट कैलकुलेशन सही होनी चाहिए किस तरह से ज्यादा मुनाफा बनाया जाए उसके लिए आपके पास ऑपरेशनल एक्सीलेंस होने चाहिए कम से कम खर्च कैसे आए आपकी प्रोडक्टिविटी और प्रॉफिट एबिलिटी को कैसे बढ़ाया जाए उसके ऊपर हमेशा ध्यान दीजिएगा तो मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि आपका बिजनेस कभी भी किंगफिशर ऐसी नौबत में नहीं आएगा

मेरे जीवन का लक्ष यही है कि मैं इस देश में एंप्लॉयमेंट और प्रोडक्टिविटी और प्रॉफिट एबिलिटी को बढ़ा दूंगा. इस तरह से नित नवीन माहिती के माध्यम से के इंडस्ट्रीज को वाकिफ करना चाहता हूं कि बिज़नेस ग्रोथ कैसे कर सकते हैं और सही तरीके से बिजनेस करके हम चाइना को कैसे मात दे पाएंगे आइए इस मुहिम में जुड़िए अगर आपको हमारे ब्लॉग अच्छा लगता है तो जरुर शेयर कीजिए लाइक कीजिए.

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